जिन्होंने अपने जीवन की शुरुआत लोगो के घर में अखबार डालने से की थी
आज उन्ही की खबर दुनिया के हर अखबार में हैं
'देखो क्या कमाल कर गए कलाम
आखिरी सलाम कलाम साहब, वो आसमाँ थे मगर सर झुकाए हुए थे
आज उन्ही की खबर दुनिया के हर अखबार में हैं
'देखो क्या कमाल कर गए कलाम
आखिरी सलाम कलाम साहब, वो आसमाँ थे मगर सर झुकाए हुए थे
तू बेशक अपनी महफ़िल में मुझे बदनाम करती हैं…
लेकिन तुझे अंदाज़ा भी नहीं कि वो लोग भी मेरे पैरछुतेहै.....
जिन्हें तू भरी महफ़िल में सलाम करती है.......
ऐ खुदा अपनी अदालत में मेरी ज़मानत रखना
मैं रहूँ ना रहूँ, मेरे दोस्तों को सलामत रखना .


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