Debates
Saturday, 1 August 2015
तू बेशक अपनी महफ़िल में मुझे बदनाम करती हैं
तू बेशक अपनी महफ़िल में मुझे बदनाम करती हैं…..
लेकिन तुझे अंदाज़ा भी नहीं कि वो लोग भी मेरे पैर छुते है.....
जिन्हें तू भरी महफ़िल में सलाम करती है......
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